मेरी दुनिया, मेरा आधार है मेरी कलम,
जब भी उदास हो जाती हूँ मैं,
जाने कितनी उदास हो जाती है मेरी कलम...!
जो कह नहीं पाती किसी से,
वो सब कह जाती है मेरी कलम,
मेरे आँसू भी समझती है,
मेरी ख़ामोशी भी पढ़ जाती है मेरी कलम...!
- हेमप्रिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X