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माता पिता दिवस

                
                                                         
                            माता-पिता के लिए क्या लिखूँ, जिन्होंने खुद मुझे लिखा,
                                                                 
                            
जिनकी बदौलत ही तो यह सुंदर संसार दिखा।
एक छोटा-सा पत्थर भी बाँध मैं चल नहीं सकता,
किंतु नव मास मुझे माँ ने अपनी कोख में रखा।
छोटी-सी पीड़ा भी मुझसे सही नहीं जाती,
गर्भ की वह महापीड़ा माँ आपने कैसे सही?
उँगली पकड़कर चलना सिखाया मुझे आपने,
रात-रात भर जग-जगकर सुलाया मुझे आपने।
क्या कहूँ उनके लिए, जिन्होंने खुद मुझे सींचा...

पापा ने सर उठाकर जी सकूँ, इतना योग्य बनाया,
मेरी ख़ुशी के लिए अपनी सारी ख़ुशियों को भुलाया।
बता नहीं सकता, अनगिनत हैं उपकार,
आपसे ही तो रोशन है मेरा संसार।
हर उपमा फीकी है आपके सामने,
शब्द कहाँ से लाऊँ कुछ भी बोलने?
महिमा तो सात समुद्र की स्याही में भी पूरी न हो,
बस भावना मेरी इतनी—आपकी हर कामना पूरी हो।
'हर्षित ' माता-पिता के बिना जीवन है फीका...
 
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2 महीने पहले

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