ज़िंदगी तू भी लेती कितने इम्तिहान है
हार कर भी मेरा हौसला अभी जवान है
करती हूँ जीतने की हर बार कोशिशें
मुझको रोकती ख़ामियों की चट्टान है
एक तूफ़ान है मेरे भीतर छुपा हुआ
हाथों में थामना मुझे पूरा आसमान है
मिली नाकामी मुझे हर बार सही
रोक सके मुझे ऐसी ना कोई थकान है
मुक़द्दर चाहे जैसा भी हो मेरा
अपने फ़ैसलों पर मुझे बड़ा गुमान है
ना छोड़ी मैंने अपने सपनों की परवाज़ कभी
चाहे हर कदम ने किया मुझे लहूलुहान है
मेरा इल्म ही है असासा मेरा
और न कोई मेरी दूसरी पहचान है
- हर्षदा डोंगरे
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