सत्य-प्रयास,,
दिशाएँ गूँज सी उठीं देखकर,
सत्य-प्रयास तुम्हारा।
सजग हो चली अलख,
पलों में विश्वास तुम्हारा।
जिस श्रम ने स्वेद दिया,
वह रंग लाएगा ही।
नभ पर नव-रंग बनेगा,
सदा उल्लास तुम्हारा।
और तनिक ले माप,
समय इतना क्रूर नहीं है।
रुककर देख ज़रा राही,
मंज़िल दूर नहीं है।
— हरिओम सोनू
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X