भीड़ ने जिसको ठुकराकर अलग कर दिया होगा,
समझ लेना सफ़र सच का ही उसने तय किया होगा।
यहाँ झूठों की महफ़िल में जो सच बोलता होगा,
आईना जिसने दिखलाया, निशाने पर रहा होगा।
बेरहम इस ज़माने में वफ़ा को पूछता है कौन,
जिसे सच्चा समझ बैठे, वही धोखा दिया होगा।
सच को सुन सके ऐसा मिला ना आज तक कोई,
जो कड़वा सच सुनाएगा, वही दुश्मन बड़ा होगा।
चिकनी बात करने की जिसे आदत रही होगी,
मौका मिलते ही उसने ख़ंजरों का वार किया होगा।
जो चेहरा साफ़ दिखता है, भरोसा सोच कर करना
न जाने किन नक़ाबों में चेहरा क्या- क्या छिपा होगा।
काँटों की डगर पर जो मुसाफ़िर चल रहा होगा,
उसी के पाँव के नीचे भी कोई गुल खिला होगा।
न डर दुनिया के झूठों से , अगर सच साथ है तेरे,
तेरी ख़ामोशियों में भी कोई तो सच बोलता होगा
-हरिशंकर 'हरि'
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