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हुनर का कमाल रखना

                
                                                         
                            ज़ुबाँ पर प्यार और दिल में जमाल रखना।
                                                                 
                            
हर इक रिश्ते में थोड़ा सा ख़याल रखना,

किसी के ऐब को हरगिज़ उछालना न कभी,
अगर हो दोस्ती तो उसका ख़याल रखना।

ग़रीब-ओ-बेसहारा भी हैं इस जहाँ में बहुत,
मिले जो वक़्त तो उनका भी ख़याल रखना।

कभी ग़ुरूर की आंधी में बह न जाना तुम,
हमेशा अपने हुनर का कमाल रखना।

किसी की बात से दिल पर न लेना बोझ इतना।
फ़क़त ज़रूरी बातों का मलाल रखना।

अँधेरों से जो लड़ना हो तो हौसला भी रखो,
चराग़ दिल में मुहब्बत का हर हाल रखना।

जो सच की राह पे निकले हो, डट के चलते रहो,
न झूठ से कोई रिश्ता, न सवाल रखना।

बड़ों का अदब, छोटों पे करम सदा करना,
यही है फ़र्ज़, इसे हर घड़ी बहाल रखना।

मक़ता :
"ज्ञानेश" अपनी फ़िक्र को इंसाँ के काम रख,
ज़माने भर की भलाई का ख़याल रखना।

 
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2 महीने पहले

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