खिलौना
समझ कर
किसी के दिल
से मत खेल क्योंकि
हर दिल में वही बसता
हम सभी जिसके हाथ का खिलौना
उसी के इशारों पर है चलना- फिरना
कभी चाबी न भरे तो धरती पर पड़ना
फिर मिट्टी में मिट्टी बन कर अपना अस्तित्व खोना
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X