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मैं खिलाफ हूं

                
                                                         
                            हां, मैं एक लड़की हूं ।
                                                                 
                            
जो घुंघट के ख़िलाफ़ हूँ
नज़रे वो झुकाए रखे जिनके नियत साफ नहीं ।
मैं कन्यादान के खिलाफ हूं, क्योंकि
दान वस्तु का होता है और स्त्री कोई वस्तु नहीं।
हां मैं एक लड़की हूं ।
जो ऐसे पुरुष के खिलाफ है
जिसकी मर्दानगी रसोई में आने से ख़त्म हो जाती है ।
मैं ऐसे परिवेश के खिलाफ हूं,
जहाँ बेटे को बेलन पकड़ने से रोका जाता हो।
और हाँ मैं एक लड़की हूं
जो ऐसे सम्मान के खिलाफ हूं
जो केवल पैसे के कारण दी जाती हो
मैं ख़िलाफ़ हूँ
पर मैं खिलाफ समाज से नहीं हूं
बल्कि समाज के दोगलेपन से हूं ।
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2 महीने पहले

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