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नमक छिड़कने वालों की हम आश लगा रखे हैं।

                
                                                         
                            बुराई करने को कुछ लोग लगा रखे हैं।
                                                                 
                            
गैर तो बहुत कम हैं ज्यादा अपने को लगा रखे हैं।।
बिना पगार लिये बुराई करते हैं ईमानदारी से,
दिन तो दिन उन्हें रात में भी जगा रखे हैं।
गुमनाम था मैं अपने समाज में इससे पहले,
आज इतना मशहूर हूँ कि दुश्मन के पाँव भी डगमगा रखे हैं।
बुराई सुनकर ही खुद को तराशा है मैंने,
शुक्रगुजार हूँ उनका जो मुझे जगमगा रखे हैं।
इंतजार करता हूँ ज़ख्म का बहुत बेसब्री से,
ज़ख्म देने को कुछ दोस्त भी दगा रखे हैं।
मरहम की उम्मीद कभी ' कृष्ण ' को नहीं,
नमक छिड़कने वालों की हम आश लगा रखे हैं।
-- गोपी नाथ कृष्ण
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2 दिन पहले

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