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रंगा चूहा

                
                                                         
                            अपने बड़ा बाबू हैं पहुंचे हुए फकीर।
                                                                 
                            
उनके जैसा कोई मिलता नहीं नज़ीर।।
वैसे तो इनके करतब को रोमांचक सबने माना है।
'रंगा चूहा' का सनसनीखेज प्रसंग हमने जाना है।।
छज्जे पर इन्होंने मालदह आम का पाल लगाया।
अगले दिन कुछ आम को वहाँ कुतरा हुआ पाया।।
प्रतिशोध लेने को छज्जे पर रात में लगा दी चूहेदानी।
एक भी फंस जाए तो फिर चूहे करेंगे नहीं मनमानी।।
फंसा चूहा तो उसे एक किलोमीटर दूर जाकर फेंका।
लेकिन अफसोस अगले दिन फिर चूहा फंसा देखा।।
सप्ताह भर यही क्रम चलता रहा तो हुई शंका की बात।
कहीं एक ही चूहा आम खाने तो नहीं आता है रोज रात।।
जाँच के लिए बड़ा बाबू ने बड़ी मेहनत का किया जुगार।
फंसे चूहे को नील में रंगारंग कर करवा दिया फरार।।
दूसरी सुबह चूहेदानी पर ज्योंही पड़ी साहब की नजर।
"नीलहे-चूहा" को मूँछ फड़फड़ाते देख हो गये रंजोगर।।
और भी कुछ करते मशक्कत पर खत्म हो गये आम।
पड़ोसी की बिल्ली नें रंगा-चूहा का किया काम तमाम।।
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3 महीने पहले

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