मुझे शक नहीं तेरे बातों का
यकीन हो चला है
बेअदब थी तुम्हारी बातें
बेअक़्ल थी तुम्हारी बातें
पर छोड़ो
यकीन हो चला है
उस रात जब मैं घर लौटा
सो चुकी थी तेरी बातें
कमरे का दरवाज़ा खुला सा था
कुछ आहट हुई तुम्हारी अँगड़ाई की
जो अक्सर तुम मुझे ढूँढने को लिया करती थी
पर छोड़ो
अब यकीन हो चला है
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