तेरी शिकायतों के पुलिंदे बढ़ते चले गए,
हम अपने आप को गुनहगार मान गये,
इस बदगुमानी में यू फंसते चले गए,
तेरी शिकायतों के पुलिंदे और बढ़ते चले गए।
अब हवाओं ने रुख बदला है ,
मेरी सिम्त को तुझसे मोड़ा है ,
भूल आई थी जिस मैं को,
आज फिर मैंने उससे रिश्ता जोड़ा है ।
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