वह आईना भी कितना खूबसूरत है,
जो मुझे हर हाल में खूबसूरत दिखाता है।
नज़रों में समाया है एक अनूठा सा जादू,
जो मेरी सादगी को भी बेमिसाल बनाता है।
भले ही आँखों में काजल लगे न लगे,
भले ही बालों में कंघी चले न चले,
वह मेरी रूह का ऐसा नूर चुराता है,
कि हर दिन एक नया सवेरा बन जाता है।
न उसे किसी सजावट की दरकार है,
न किसी बनावटी शृंगार की चाहत,
वह तो बस मेरी मासूमियत पर मर मिटता है,
और मेरी हर ख़ामी को अपनी चाहत से ढकता है।
हमारी खूबसूरती को निखारने में,
वह अपना सबसे बड़ा योगदान दे जाता है,
क्योंकि वह चेहरे की चमक नहीं,
मेरी आत्मा की सच्ची खूबसूरती को पहचान जाता है।
वह आईना भी कितना खूबसूरत है,
जो मुझे हमेशा, सिर्फ और सिर्फ खूबसूरत दिखाता है।
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