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सबकी अभिश्राप लेता तू , रोजाना पाप कमाता तू।।

                
                                                         
                            क्यू तेल मालिश करता तू, जूता पॉलिश करता तू ।
                                                                 
                            
हरकत हैं तेरी चमचे सी,क्यू समझ नहीं पाता तू।।
अधकारियो का तू बना कुत्ता, तू क्यूं उसके घर में डारे डेरा ।
सबकी अभिश्राप लेता तू , रोजाना पाप कमाता तू।।
एक दर्द सभी को होता है, चमचा नहीं वो बनना चाहता है
लोगों को कैसा लगता है,काम न उनका होता है।
तब आह उसकी निकलती है ,उसके साथ असभ्य व्यवहार का होना।
सबकी अभिश्राप लेता तू,रोजाना पाप कमाता तू।।
कामगार हैं तो क्या हुआ,उसका दिल भी रोता है।
वो बोल नहीं सकता, जब सम्मान वो अपनी खोता है।
अपने स्वार्थ के चक्कर में, – 2
उसके लिए जाल क्यू तू बुनता ।।
सबकी अभिश्राप ----
अतुल ‘गीतकार’की ज़ुबान को, तुम लिख लो इस बात को ।
इक दिन भी ऐसा आएगा । तू तड़प तड़प कर मर जाएगा ।।
कोई साथ ना देगा तेरा, जब दर्द से तू तड़पेगा।
 
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2 दिन पहले

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