“ ख़ुद को पहचानो”
भीतर नैतिक दीप है, जगमग करता रोज़ ।
सत्य मार्ग पर चल पड़े, मिटे अंधियारी सोच ॥
ईमानदारी की डगर, कठिन सही पर साफ़ ।
झूठ छल से दूर रहो, यही जीवन का लक्ष॥
मन की आवाज़ सुनो, अंतरात्मा का मान ।
सच्चाई से ही बढ़ सके, जीवन का सम्मान ॥
धन दौलत सब क्षणिक, चरित्र अमर प्रकाश ।
सत्य पथ पर जो चले, वही बने ख़ास ॥
कठिन समय में भी रखो, ईमान का सहारा ।
नैतिकता से जग सजे, जीवन हो उजियारा ॥
दूसरों पर जो असर, हर निर्णय से होय ।
सत्य मार्ग अपनाइए, यही जीवन का सोय ॥
सच्चे कर्मों से बने, उज्ज्वल जीवन चित्र ।
ईमानदारी की डगर, सबसे सुंदर मित्र ॥
नैतिकता का दीपक, जलता रहे निरंतर ।
सत्य-प्रकाश से सजे, जीवन पथ निरंतर ॥
-शिव राय पुरी
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