आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

“ख़ुद को पहचानो”

                
                                                         
                            “ ख़ुद को पहचानो”
                                                                 
                            

भीतर नैतिक दीप है, जगमग करता रोज़ ।
सत्य मार्ग पर चल पड़े, मिटे अंधियारी सोच ॥

ईमानदारी की डगर, कठिन सही पर साफ़ ।
झूठ छल से दूर रहो, यही जीवन का लक्ष॥

मन की आवाज़ सुनो, अंतरात्मा का मान ।
सच्चाई से ही बढ़ सके, जीवन का सम्मान ॥

धन दौलत सब क्षणिक, चरित्र अमर प्रकाश ।
सत्य पथ पर जो चले, वही बने ख़ास ॥

कठिन समय में भी रखो, ईमान का सहारा ।
नैतिकता से जग सजे, जीवन हो उजियारा ॥

दूसरों पर जो असर, हर निर्णय से होय ।
सत्य मार्ग अपनाइए, यही जीवन का सोय ॥

सच्चे कर्मों से बने, उज्ज्वल जीवन चित्र ।
ईमानदारी की डगर, सबसे सुंदर मित्र ॥

नैतिकता का दीपक, जलता रहे निरंतर ।
सत्य-प्रकाश से सजे, जीवन पथ निरंतर ॥
-शिव राय पुरी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर