मणिपुर में सुलगी ज्वाला,इंसानियत को जला रही
हैवानियत में अंधी दुनिया,ख़ूनी चेहरे दिखा रही
नफ़रत के ये अंधे हिंसक,बर्बर तांडव कर रहे
तेरे-मेरे अहंकार में,अपनों से ही मर रहे
नग्न-अपमानित नारी बेबस,लहू के आँसू रोती हैं
मर्यादा की लाश पर अब तो,इंसानियत भी सोती हैं
हिंसा में जो अंधे कायर,भूल गए हैं सब मर्यादा
खून के बदले खून बहाना,ख़ुद मिटने की ज़िद हैं ज़्यादा
मणिपुर की आब-ओ-हवा में,ज़हर-भरी ये हवा चली
राजनीति की इस साज़िश से,खूनी फ़िज़ा हर तरफ़ ढली
मणिपुर में जो आग लगी हैं,देश के माथे दाग़ हैं वो
गद्दार हैं आग लगाने वाले,सत्ता का भी पाप है वो
मणिपुर की इस हिंसा में,देश-विरोधी हाथ भी हैं
भारत को खंडित करने में, ये सब के सब साथ भी हैं
मणिपुर की ये लपटें अब तो,देशहित में बुझा दो यारों
भारत एक था,एक रहेगा,दुश्मनों को दिखला दो यारों
जिस मणिपुर के वीरों ने,जग में भारत का नाम किया
मीराबाई हो या मैरीकॉम,सबने देश का मान किया
अरे मणिपुर के बाशिंदों,नारियों की तुम लाज बचाओ
हैवानियत के इस दाग़ को,इंसानियत से मिटाओ
'चीरहरण' जब नारी का होता,न्याय और तंत्र भी रोता
जहाँ सुरक्षित नारी न हो,वो देश हरदम खोखला होता
भारत की हर नारी को अब तो,सुरक्षा और सम्मान चाहिए
पाप मिटाने भारत में,श्रीकृष्ण जैसा भगवान चाहिए
देश के हाकिम सुन लो अर्ज़ी,मणिपुर को बचा लो तुम
द्रोपदी रुपी इस धरा पर,अब कृष्ण बनकर आ जाओ तुम !
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