ज़िन्दा होना ही काफी नहीं
ज़िन्दगी भी हो ज़िन्दगी की तरह
- फ़ौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X