ख़्वाब से जुड़ चुका है इस दर्जा
दिल हकीकत को मांगता ही नहीं
राब्ता इस तरह रख उसने
जैसे हमको वो जानता ही नहीं
- फ़ौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X