जानता हूं मैं कि तेरे लिए खास नहीं हूं, पर क्या करूं मुझे भ्रम में जीने की आदत है,
अब तुम ने मेरे मन को छुआ है, तो तुम को अपना मान लिया है,
भरोसा तो इतना है तुम पर,जहर भी दे दो तो वो भी पी जाऊं मैं,
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