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मुहब्बत का नशा

                
                                                         
                            मेरी मुहब्बत का नशा अपने दिल में छुपा कर रखो सनम,
                                                                 
                            
सारे ज़माने के लोगों से जुदा अपनी अदा रखो सनम,
तुम अपना मानती है मुझे तो दिल से होंठों पर दुआ करो,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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