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मेरे उजड़े हुए आशियाने को फिर ना कोई सजाए

                
                                                         
                            कभी कभी मन करता है, तुम से गले लगकर बताऊं कि,
                                                                 
                            
तुम से दूर रहकर कितना,कैसा दर्द होता है सनम,
दुआ करना खुदा से मेरे लिए कि तुम सा अब कोई जिंदगी में आए,
मेरे उजड़े हुए आशियाने को फिर ना कोई सजाए,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 दिन पहले

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