किसे आजमाये.
किस पे, रखे यकीं, किसे आजमाये,
सारे हमे जहाँ में एक से नज़र आए.
अच्छे हो या बुरे, सारे, हमे अजीज,
किसे दूर रखे अब किसे पास लाये.
आँख मूंदकर करते सब पे यक़ीन,
हम बार_बार, यही गलती दोहराए.
हमे जहाँ में, सभी लगते है अच्छे,
कौन बुरा है यहां, कोई तो, बताए.
हर किसी पर, करते हुए, भरोसा,
ज़माने में और कितने धोखे खाये.
अब अच्छा है या है बुरा, मानसी,
कोई साबित करके, जरा दिखाये.
-धीरज साहू
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