हर पल बस उनको ही देखा करते हैं,
हर ख्याल में उनको ही सोचा करते हैं,
ये सच है कि बस लम्हा भर ही देखा है उनको,
शमां के जैसे रोशन हैं वो, हम परवानों सी वफ़ा करते हैं,
कितनी ही बारिशें उनके इंतजार में गुज़र गई,
सुबह से शाम हुई और शाम से रात होकर गुज़र गई,
हम पलकें बिछाए बैठे हैं मेरे पते तक आने वाली राहों पे मगर,
उनकी सुरत में मेरे दरवाजे से हर दस्तक आके गुज़र गई,
हम हवा के हाथों उनके खातिर पैगाम दिया करते हैं,
शमां के जैसे रोशन हैं वो, हम परवानों सी वफ़ा करते हैं,
आज, कल और फिर बहुत जल्द में अरसे बिताए हैं,
हमने भी अपने अरमान टूटते हुए सितारों को सुनाए हैं,
सुना है उनकी दुआओं में हमारा ही जिक्र रहता है, और,
कहते हैं हमारे लिए उन्होंने मन्नतों के ताबीज बंधवाए हैं,
हम बंद आंखों से दीदार-ए-हुस्न किया करते हैं,
शमां के जैसे रोशन हैं वो, हम परवानों सी वफ़ा करते हैं,
काश कोई टूटता सितारा उनसे हमारी सिफारिश कर दे,
जिसमें वो भी भीगना चाहते हैं, खुदा वही बारिश कर दे,
वो लम्हे फिर से आंए और हम रुबरु हो जांए,
ख़त्म ये इंतज़ार हो और ख़ुदा पूरी सारी ख्वाहिश कर दे,
हम एक लम्हे की उस झलक में हर सांस जीया करते हैं,
शमां के जैसे रोशन हैं वो, हम परवानों सी वफ़ा करते हैं...
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