मौसम बदल गया है अब तो
गीत प्रेम के मिल संग गाओ
सूख गया राहों का दलदल
निकलो घर से कदम मिलाओ.
पट खोले कलियों ने अपने
घूम घूम कर भ्रमर भी आये
गन्ध सुगंध मकरंद सभी को
फ़ूलों बगिया में अब फैलाओ.
दूर क्षितिज से किरणें झाँके
स्वागत करना बढ़कर आगे
लहरें सरिता की बहती अब
मन अपना शीतल कर आओ.
बहती हवा मन्द गति तट पर
टुकड़े धूप के दिखे सेतु ऊपर
प्रेम प्यास अंतस में भर कर
बदले मौसम संग घुल जाओ .
-दिनेश चौहान
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