कुछ धागे टूट गये पर रिश्ते यदि जो कायम हैं
तुरपाई धीरे से कर दो डोर अभी तो कायम है.
क्या जाता अपना , थोड़ा नम हो झुक जाने से
गांठें अनदेखी लगने दो डोर अभी तो कायम है.
माँ का पेट पिता का कन्धा भाई के हाथों उँगली
खूब निभाया साथ सभी ने डोर अभी तो कायम है.
सफ़र अकेले भी होता साथ छोड़कर अपनों का
सुख दुःख में तो संग रहो डोर अभी भी कायम है.
बहती दरिया में डूबोगे जब कष्टों को पीकर देखोगे
खड़े मिलेंगे सब घर वाले, डोर अभी तो कायम है.
-दिनेश चौहान
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