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मुकाम था नहीं उसका

                
                                                         
                            रेल सी निकल गई तेज बहुत
                                                                 
                            
पटरियों सा थरथराता रह गया
मुकाम था नहीं उसका कभी
खड़ा देखता बस वो रह गया.
-दिनेश चौहान
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7 घंटे पहले

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