पेट के लिए ही तो जी रहे हैं
सारे गम दुनिया के पी रहे हैं.
जिन्दगी मौत के सौदाई भी
जहर तन्हाई का पी रहे हैं.
ले हथेली आचमन जो कर रहे
तेजाब जैसा.ही आब पी रहे हैं.
इश्क जिन्दगी में करने वाले
घूंट घूंट दर्द का जाम पी रहे हैं.
सफ़र कट जायेगा उनका भी
बैठ मयखाने में जो पी रहे हैं.
-दिनेश चौहान
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