इक छोटी सी नन्ही परी मैं, आई जब इस जहां में,
सब कुछ नया और अद्भुत सा था मेरे लिए।
मां की ममता और पिता का दुलार,
भाई का स्नेह और सबका प्यार,
रिश्तो की मिठास को समझने की वो मेरी पहली कोशिश ।
पाठशाला को वो पहला दिन, कक्षा के सब सह पाठियों का साथ
अध्यापक की वो डांट और फिर जिदंगी को समझने का सार
गुरु को पाकर, जीवन में कुछ बनने की वो मेरी पहली कोशिश।
संघर्षों से भरे वो दिन , बेचैनी भरी शाम
बनकर इक अच्छी बेटी, अपने मां बाप का सिर गर्व से उँचा करने की, वो मेरी पहली कोशिश।
समाज को जब समझा और अच्छे से सब जाना, कुछ कुरितियों ने जब मन को झिंझो़डा
पर कुछ खुबियों ने साहस भी था बंधाया,
फिर जमाने में अपने विचारों को फैलाने की वो मेरी पहली कोशिश।
जब समय ने अपना रंग दिखाया, जब कुछ भी काम न आया
जब आंसुओं से मन भर आया, तो मन की बातों को कागज पर लिख जाने की ये मेरी पहली कोशिश।
कि हर इंसान को अपने जीवन में पहली कोशिश करनी चाहिए, सुना है कोशिशें कभी नाकाम नही होती।
इन्ही शब्दों के साथ जिंदगी को ब्यान करने की ये मेरी पहली कोशिश।
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