*प्रश्न*
अतीत का पथ पकड़
पथिक चलता रहा,
भविष्य की तलाश में
वो यूं ही भटक रहा।
निराश हो निशीथ में
बैठ सोचता है अब -
सूर्य कब उगेगा?
कब मिलेगा ये भविष्य-पथ?
*उत्तर*
हृदय में अपने आश रख,
अविरल प्रयास कर,
पीछे छोड़ अतीत को,
भविष्य की तलाश कर।
यूं बैठ मत निराश हो,
उठ जा पुनः प्रयास को,
कदम बढ़ा और देख ले -
सामने भविष्य-पथ,
सामने भविष्य-पथ।
-धीरज सारस्वत धैर्य
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