अभाव और आवश्यकता
जब सूखा खेत किसानों का,
तब नीर का मूल्य हो कैसा?
जब बचा सके न मरते को,
फिर पीर का मूल्य हो कैसा?
जब मिला अन्न न भूखों को,
तब खीर का मूल्य हो कैसा?
जब काम न आए दरिद्रों का,
फिर अमीर का मूल्य हो कैसा?
तेज और समर्पण
जो तपा नहीं तपस्या में,
वो भक्त का मूल्य हो कैसा?
जो बीता भोग-विलासों में,
वो वक्त का मूल्य हो कैसा?
जो बहा नहीं देशरक्षा में,
वो रक्त का मूल्य हो कैसा?
जो बना सहारा न निर्बल का,
वो सशक्त का मूल्य हो कैसा?
रिश्ते, ज्ञान और स्वाभिमान
जो साथ न दे मुसीबत में,
उस मीत का मूल्य हो कैसा?
जो रास न आए जीवन को,
उस नीत का मूल्य हो कैसा?
जो सिखा सके न औरों को,
उस ज्ञान का मूल्य हो कैसा?
जो बिक गया चंद नोटों में,
उस स्वाभिमान का मूल्य हो कैसा?
जो मिटा न पाया अँधेरा,
उस ज्योति का मूल्य हो कैसा?
जो चमक न पाए आभा से,
उस मोती का मूल्य हो कैसा?
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