बिखरते ख़्वाब आँखों में सँभाले रात रहते हैं,
हज़ारों दर्द सीने में छुपाए साथ रहते हैं।
कभी जो नाम होंठों पर तुम्हारा आ ही जाता है,
उसी पल चाँद से ज़्यादा उजाले साथ रहते हैं।।
कहाँ आसान होता है किसी को भूलकर जीना,
किसी की याद को पलकों की चौखट से कभी सीना।
तुम्हारी एक मुस्कानों ने ऐसा रंग भर डाला,
हमें आता नहीं अब तो किसी से भी ख़फ़ा होना।।
नदी ने रेत से पूछा कहाँ तक साथ जाओगे,
हवा ने पात से पूछा कहाँ तक गीत गाओगे।
मैं बोला—प्यार सच्चा हो तो दूरी हार जाती है,
तुम्हारे नाम के दीपक सदा दिल में जलाओगे।।
नहीं देखा किसी मौसम को इतना मेहरबाँ अब तक,
तुम्हारी याद जितनी हो न उतना आसमाँ अब तक।
तुम्हारी एक आहट से महक उठती हैं राहें भी,
कली ने भी नहीं पहना तुम्हारे सा गुमाँ अब तक।।
अगर किस्मत ने चाहा तो मिलन का दिन भी आएगा,
अधूरी प्रार्थनाओं का सुनहरा क्षण भी आएगा।
यक़ीनों की धूप रखकर मैं प्रतीक्षा कर रहा हूँ बस,
तुम्हारी ओर चलता ये थका जीवन भी आएगा।।
कभी ख़ामोश आँखों से बहुत बातें निकलती हैं,
बिना बोले भी धड़कन की कई सौग़ातें मिलती हैं।
तुम्हारे नाम की ख़ुशबू हवा में घुल गई ऐसे,
मेरे आँगन की मिट्टी तक तुम्हें पहचान लेती है।।
न कोई दिन गुज़रता है न ऐसी रात जाती है,
तुम्हारी याद हर मौसम में फिर बरसात लाती है।
मैं जितना दूर जाना चाहूँ उतना पास पाता हूँ,
मोहब्बत अपने हिस्से की सदा सौग़ात लाती है।।
जो सच के साथ चलता है वही मंज़िल भी पाता है,
अँधेरा लाख हो फिर भी सवेरा लौट आता है।
मोहब्बत और नफ़रत की यही पहचान है जग में,
नफ़रत टूट जाती है, मोहब्बत मुस्कुराती है।।
पुराने ख़त, पुरानी बात अब तक याद है मुझको,
तुम्हारी हर हँसी की सौग़ात अब तक याद है मुझको।
समय ने धूल कितनी ही बिछाई रास्तों पर पर,
तुम्हारा नाम लिखी वो पहली पात याद है मुझको।।
जवानी की कहानी में कई मौसम बदलते हैं,
कभी आँसू निकलते हैं, कभी सपने मचलते हैं।
मगर सच्चे लगावों की यही पहचान होती है,
बरस बीतें मगर रिश्ते कहाँ जल्दी बदलते हैं।।
कई अवसर मिले लेकिन समय का साथ कम निकला,
कभी मैं देर से पहुँचा, कभी वो पल ही थम निकला।
यही अफ़सोस बरसों से मेरे दिल में ठहरा है,
मिलन का फूल खिलने से पहले ही पतझर निकला।।
तुम्हारी आँख का काजल मुझे संसार लगता है,
तुम्हारी हँसी का हर स्वर मधुर झंकार लगता है।
जहाँ तुम साथ चलती हो वहीं उत्सव उतरता है,
तुम्हारा हाथ ही मुझको सभी त्यौहार लगता है।।
चलो इस बार फागुन में नए सपने सजाएँगे,
गुलाबी धूप के संग नेह के दीपक जलाएँगे।
न शहरों की थकन होगी, न रिश्तों पर धुआँ होगा,
तुम्हें लेकर नदी तट पर नए मौसम बसाएँगे।।
यही चाहा कि दुनिया में किसी का मन न घायल हो,
किसी निर्धन की आँखों का कभी सपना न ओझल हो।
जहाँ भी प्रेम की ख़ुशबू बहे, वह घर महकता हो,
किसी माँ की दुआओँ का कभी आँचल न बेकल हो।।
समय सब कुछ मिटा देता, मगर एहसास रहता है,
किसी के प्रेम का जीवन में मधुमास रहता है।
महल, दौलत, हुकूमत सब यहीं रह जाएँगे इक दिन,
मगर इंसानियत का नाम इतिहास रहता है।।
कन्हैया की बाँसुरी से जो मधुवन गुनगुनाता है,
उसी स्वर में कहीं राधा का मन भी मुस्कुराता है।
जहाँ विश्वास के रंगों से रिश्ते रंग दिए जाएँ,
वहीं हर एक मौसम प्रेम का उत्सव बन जाता है।।
सजी हो आरती मन की, सजे विश्वास की रोली,
हँसी के रंग से भर जाए हर आँगन की हर होली।
न केवल रंग तन पर हों, हृदय भी रंग जाएँ सब,
मिलन की एक मुस्कानें बना दें उम्र भर होली।।
सुबह की ओस ने पत्तों पे मोती जब सजाए थे,
तुम्हारी याद के पंछी तभी आँगन में आए थे।
हवा ने छेड़ दी ऐसी मधुर सरगम तुम्हारे नाम,
कि सूखे वृक्ष भी पल भर में फिर से मुस्कुराए थे।।
जहाँ अन्याय बढ़ता है वहीं प्रतिकार होता है,
अँधेरा चाहे जितना हो वहीं उजियार होता है।
कभी नफ़रत नहीं जीती किसी भी दौर में सुन लो,
जहाँ सच्चा हृदय होता वहीं सत्कार होता है।।
अगर तुम साथ होती तो सफ़र आसान हो जाता,
मेरे हिस्से का हर संघर्ष भी वरदान हो जाता।
मुझे विश्वास है किस्मत भी इक दिन मुस्कुराएगी,
तुम्हारा हाथ मिल जाता तो जीवन गान हो जाता।।
~धनु वर्मा~
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