दिल को दुखा कर भी इनायत चाहते हो ।
इश्क की सजा में रिआयत चाहते हो।।
बता दिया है लोगों को तुझे सबसे अच्छा,
और तुम हो कि हमसे शिकायत चाहते हो।
हम तो अब भी दीवाने है सन्नाटों के,
एक तुम हो जो बगावत चाहते हो।
दिल भी तोड़ा है और साथ किए वादे भी,
मगर अब भी तुम हम से मुहब्बत चाहते हो।
गवा दिया है तुमने अपना हक मुझ पर से ,
पता नहीं अब तुम क्यों मुझ पर सियासत चाहते हो।
मैंने तो आज तक पूछा नहीं कुछ भी तुम से ,
फिर तुम क्यों मुझसे वजाहत चाहते हो।
जिस तरह के हो गए है हालत मेरे ,
क्या तुम देव की मुफिलत चाहते हो ।।
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