दीमक-
बहुत सूक्ष्म पर खतरनाक कीट I
इलाज होना चाहिए इसका,
क्योंकि यह कीमती इमारती लकड़ी को
भीतर-ही-भीतर खोखला कर देती है।
पर क्या दीमक
हर प्रकार की लकड़ी को खाती है?
या केवल कमज़ोर और कच्ची लकड़ी को?
क्या सख़्त और सूखी लकड़ी का
कुछ बिगाड़ पाती है?
सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाएँ हों
या तकनीकी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएँ—
प्रश्नपत्रों का लीक होना
निस्संदेह गंभीर अपराध है;
युवाओं के भविष्य के साथ
एक क्रूर खिलवाड़ है।
यक्ष प्रश्न—उत्तरदायी कौन है?
सरकार—
अपनी ढीली व्यवस्था के लिए।
संस्थाएँ—
अपने भीतर पलती
भ्रष्टाचार रूपी दीमक के लिए।
या शायद इन सबसे अधिक—
वे अभिभावक,
जिन्हें अपने बच्चों की प्रतिभा पर विश्वास नहीं,
या जिनके बच्चों में प्रतिभा है ही नहीं ।
लीक प्रश्नपत्र खरीदकर,
नकल का सहारा लेकर वे
अपने बच्चों का भविष्य संवारना चाहते हैं,
पर किसी योग्य अभ्यर्थी का अधिकार
छीन लेते हैं।
समस्या की जड़ कहाँ है?
स्वयं से भी पूछना होगा—
सार्थक परिवर्तन
सड़कों पर प्रदर्शनो में उठते शोर से कम,
अंतरात्मा में उठते प्रश्नों की-
बुनियाद पर अधिक होते है।
क्या हम स्वयं ही इस दीमक को
पनपने का अवसर तो नहीं दे रहे?
यदि जहर के खरीदार ही न हों,
तो बिकेगा किसे?
पूछना चाहिए स्वयं से भीI
-देवेंद्र भण्डारी
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