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टूट गया गुमान

                
                                                         
                            देश की युवा पीढ़ी—
                                                                 
                            
शिक्षित, समझदार, कल्पनाशील,
इनसे ही तो दीखता था
देश का उज्ज्वल भविष्य,
युवा शक्ति पर
हमें कितना अभिमान था।

मुद्दा उचित था,
जिसके लिए किया गया
धरना, प्रदर्शन और उपवास I

आलोचना करना, प्रश्न पूछना,
उत्तर मांगना
अधिकार हैं इसका ,
पर—
अमर्यादित, असभ्य
और अश्लील भाषा का
ऐसा प्रयोग, बेझिझक !

इसे देखकर
भारत ही नहीं,
पूरी दुनिया के सभ्य नागरिक
हैरान हुए—
और भारतीय होने के नाते
हम शर्मसार।

विस्मित है मन—
कौन-सी हैं वे पाठशालाएँ?
कैसा है वह परिवेश,
कैसे हैं वे लोग,
जहाँ से पा रहे हैं ये
ऐसे संस्कार,
ऐसा ज्ञान?

टूट गया है सारा गुमान—
विकास के लक्ष्य
हासिल कर लिए,
विकसित भी बन गए,
पर सभ्यता और संस्कार
पीछे छूट जाएँ,
तो क्या सचमुच
कहलाएगा हमारा देश
महान?
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2 महीने पहले

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