आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुम आते तो बातें होतीं

                
                                                         
                            तुम आते तो बातें होतीं,
                                                                 
                            
परियों वाली रातें होतीं।
अलसाये से दिन भी होते,
अमृत की बरसातें होतीं।
तुम आते तो बातें होतीं।

खामोशी को लफ्ज़ मिल जाते,
दिल के सारे गुल खिल जाते।
शाम ढले जब महफ़िल सजती,
एक खुदा क्या दो मिल जाते।
तुम आते तो बातें होतीं।

किस्मत के पन्ने खुल जाते,
ग़म दुनिया के सब धुल जाते।
ढूंढ रहे थे जिन ख़्वाबों को,
वो पल भर में हम पा जाते।
तुम आते तो बातें होतीं।

-देवेन्द्र पंत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर