तुम आते तो बातें होतीं,
परियों वाली रातें होतीं।
अलसाये से दिन भी होते,
अमृत की बरसातें होतीं।
तुम आते तो बातें होतीं।
खामोशी को लफ्ज़ मिल जाते,
दिल के सारे गुल खिल जाते।
शाम ढले जब महफ़िल सजती,
एक खुदा क्या दो मिल जाते।
तुम आते तो बातें होतीं।
किस्मत के पन्ने खुल जाते,
ग़म दुनिया के सब धुल जाते।
ढूंढ रहे थे जिन ख़्वाबों को,
वो पल भर में हम पा जाते।
तुम आते तो बातें होतीं।
-देवेन्द्र पंत
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