शायद ये आख़िरी ख़त हो,
मैं वापस न लौट सकूँ।
घड़ी में सुबह के चार बजे हैं।
शायद ये आख़िरी ख़त हो,
मैं वापस न लौट सकूँ।
मैं जानता हूँ, तुम मेरी हो।
इस बार वापस आना हुआ तो
वो पीली साड़ी पहनना।
न लौट सकूँ तो
वो सफेद वस्त्र ओढ़ लेना,
मगर उसमें मनचाहे रंग भरना,
मनचाहे रंग भरना।
तुम्हारी दी हुई घड़ी
इस ख़त के साथ भेज रहा हूँ।
न लौट सका तो
मेरे साथ ही दफ़ना देना।
उस वक़्त का मिट जाना ही अच्छा है
जो मैं तुम्हें न दे सका।
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