आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल धड़कता है साँस चलती है उसके दम से

                
                                                         
                            कहो भगवान उसको या कहो ख़ुदा उसको,
                                                                 
                            
वो एक है चाहे जिस नाम से बुला उसको।

हर लम्हा और हर वक्त तेरे साथ में रब है,
वो तेरे पास है कहाँ जाकर ढूंढना उसको।

हवा में और फ़िज़ा में हर शय में वही तो है,
निज़ाम उसी का है हर सिम्त देखना उसको।

नहीं वाक़िफ तू अपनी मंज़िल-ए-मक़सूद से,
पता है तेरी मंज़िल और तिरा रस्ता उसको।

उसकी रहम-नज़र हर वक्त हम पर रहती है,
हमने सजदा कभी किया या न किया उसको।

दिल धड़कता है साँस चलती है उसके दम से,
"शमीम" हमने ख़ुदी में महसूस किया उसको।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर