शुक्रिया उन आँखों का
जिन्होंने मुझे देखा, परखा नहीं,
शुक्रिया उन हाथों का
जिन्होंने गिरने पर थामा, गिना नहीं।
शुक्रिया उस दर्द का
जिसने मुझे तोड़ा,
और तोड़ कर ही तो
मुझे खुद से जोड़ा।
शुक्रिया उन लोगों का
जो छोड़ कर चले गए,
वो रहे होते तो
शायद मैं खुद को कभी न मिलता।
शुक्रिया इस जिंदगी का,
जो हर रोज़ गिराती भी है,
और हर रोज़ उठाती भी है,
शुक्रिया उस परमात्मा का
जो बिना कहे सब सुनता है।
आज किसी से शिकायत नहीं,
बस शुक्रिया है,
साँसों का, धड़कनों का,
और तुम्हारा,
जो इस पल को पढ़ रहे हो।
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