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                            मैं तेरे संग चलूंगा मैया, पकड़ के तेरा हाथ,
                                                                 
                            
मत रो, मत रो, मेरी मात।

माँ तेरा भारत से युग युग का नाता है ,
तेरे हाल को देखूं तो मुझे रोना आता है ,
तेरे अपने ही लाल तेरा ,,,छोड़ रहे हैं साथ
मत रो मत रो मेरी मात-- 2

कभी भाषाओं की माँ, तू ही महारानी थी ,
वेदों से जन्मी थी, ऋषियों की वाणी थी
आज नहीं तो कल मैया फिर बदलेंगे हालात
मत रो मत रो मेरी मात --2

मेरे सच्चे भारत की माँ, तू परिभाषा है
भारत के जन-जन की, बस तू ही आशा है
सूरज उगने ही वाला है ,कटने वाली है रात
मत रो मत रो मेरी मात--2

आओ फिर सीने से *हिंदी* को लगाले हम
पल-पल के जीवन में *हिंदी* अपना ले हम
पाल के सौतन मां के घर में ,करते क्यों आघात
पकड़ लो माँ का हाथ--2

हम हिंदी संग चलेंगे पग पग पकड़ के इसके हाथ
बदलेंगे हालात।
न छोड़ेंगे साथ।
मत रो मत रो ऐ मात,
मत रो मत रो ऐ मात

मैं तेरे संग चलूंगा मैया पकड़ के तेरा हाथ
मत रो मत रो ऐ मात
-देवेन्द्र सिंह चौहान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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