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किसी अपने छूटते को मनाना

                
                                                         
                            याद है तुम्हें ??
                                                                 
                            
मैंने तुम से कहा था
मुझ से रूठा मत करो

जवाब में तुम ने पूछा था
क्यूँ. ??
मैंने कहा था ...
मुझे मनाना नहीं आता

इस पर तुमने कहा था
वक्त दो सीख जाओगे

और मैंने गर्वीले स्वर में कहा था
ऐसा कभी नहीं होगा
तुमने कहा था
मैं सीखा कर छोडूंगी

तुमने गलत कहा था
जब तुम छोड़ कर जा रही थी
मैं नही सीखा था तुम से
रूठे को मनाना
किसी अपने छूटते को मनाना

मगर तुम्हारे जाने के बाद
यादों ने सीखा दिया है
कैसे मनाते है किसी रूठे हुए को
कैसे मनाते हैं किसी टूटे हुए को
कैसे मनाते है किसी छुटे हुए को

इसी के साथ साथ सीख लिया है
घरों से नाराज परिंदों को लौटाना
पेड़ों से रूठी पत्तियों को मनाना
नदियों के लिए पर्वतों में राह बनाना
कश्तियों से नाराज लहरों को मनाना

लगभग हर रिश्ता संभालना
सीख लिया है...
लेकिन काश
यह हुनर तुम्हारे रहते सीख लिया होता।
तब शायद
इतना कुछ सीखने की ज़रूरत ही न पड़ती।
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3 महीने पहले

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