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वतन के प्यारे सुनो

                
                                                         
                            वतन के प्यारे सुनो, यह देश है तुम्हारा।
                                                                 
                            
ये जमीं, ये गगन है, ये संदेश है तुम्हारा।।

बहती पवन यहाँ बहती है सुन्दर नदियाँ,
बनकर शीतल हवा, बनकर पावन जल।
वन उपवन चहक रही यहाँ पर चिड़ियाँ,
महक रही है खुशबू, ये सुमन सी निर्मल।
रखवाले तुम्हीं इसके, ये गीत है तुम्हारा।
वतन के प्यारे सुनो, यह देश है तुम्हारा।।

मिट्टी यहाँ की हर इत्र से महक रही है,
इस खूबसूरत वतन की सूरत तुम्हीं हो।
जीवन की बाजी लगाकर सज रही है,
वह संगीत की सुन्दर साज तो तुम्हीं हो।
पहरेदार भी तुम्हीं, पहरा है यहाँ तुम्हारा।
वतन के प्यारे सुनो, यह देश है तुम्हारा।।
-देवनन्दन कुमार 
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2 महीने पहले

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