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खुशी के गीत चलो रे

                
                                                         
                            सबको गले लगाते चलो रे।
                                                                 
                            
खुशी के गीत गाते चलो रे।।

चकाचौंध दुनियां है यहां की
सबको सच बताते चलो रे।
निराशा के बादलों से कभी
बेखबर नहीं घबराते चलो रे।।

बहुत जलन है पीड़ा को भी
हृदय से हर रोज लगाते चलो रे।
इस मिट्टी की रज- कण न्यारी
जीवन में धूल कण मलते चलो रे।।

बदलते हुए मौसम में कुछ दिन
तुम खूब अश्क बहाते चलो रे।
सुनहरे सपनों को सजकर फिर
हर पल नए गीत गाते चलो रे।।
- देवनन्दन कुमार
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3 महीने पहले

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