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शिव आदि हैं, शिव अंत हैं

                
                                                         
                            शिव आदि हैं, शिव अंत हैं
                                                                 
                            
वैरागी हैं, गृहस्थ हैं
शिव आग हैं, शिव भस्म हैं
प्रलय हैं, शिव सृजन र्है
शिव तांडव हैं, संगीत हैं
वह कंठ से निकले गीत हैं
साकार हैं, निराकार हैं
शिव गंगा की रसधार हैं
वह प्यास हैं, वह तृप्ति हैं
शिव धरा हैं, आकाश हैं
वह आस हैं, विश्वास हैं
शमशान हैं, शिव चिता हैं
शिव शिशु हैं, शिव पिता हैं
वह विष भी हैं, अमृत भी हैं
शिव भांग हैं, धतूर हैं
शिव शिव भी हैं गौरी भी हैं।
शिव आदि हैं, शिव अंत हैं
शिव अनंत हैं, अनंत हैं।
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2 महीने पहले

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