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जगन्नाथ दर्शन की तड़प

                
                                                         
                            थक गया हूँ मैं प्रभु,
                                                                 
                            
तेरे बुलावे के इंतजार में,
कब बुलाओ हे जग के नाथ मुझे,
अपने पुरी धाम में।।

आँखें तरस गई है तुझे देखने को
रहा नहीं जाता तुझसे मिलने को
लगता है भूल गए हो आप मुझसे
पर फिर भी राह देखता हूँ तेरे
बुलावे की

बलभद्र संग सुभद्रा है आपके साथ,
भुजाएं हैं आपकी जैसे गले लगाने को
बुला लो न हे जगन्नाथ,
तरस रहा हूँ मैं तुमसे मिलने को
-चिनु मिश्रा 
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3 घंटे पहले

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