ज्ञान का पिटारा बनी सोशल मीडिया हर तरफ ज्ञान भंडार,
जिसको देखो इस मंच पर दे रहा इक दूजे को धोबी पछाड़।
कोई न समझे खुद को कम नसीहत हो गई आज बेकार,
अनपढ़ भी दे दे सब लोगों को इस मंच पर ज्ञान अपार।।
पढ़ें लिखे बुद्धि जीवी भी लगता है हो गये जैसे आज बेकार,
कहीं गुरु सिखाते थे चेलों को ले लो हमसे ज्ञान भंडार,
आज चेले सिखाते हैं गुरुओं को गुरु जी हो गये तुम बेकार।
तुम्हारी पोथी खूब पढ़ी हमने हो गया हमारा अब बारम्बाट,
हमारे ही कारण उड़ाते रहे तुम मिलकर सब पूरे ठाठ।।
अब मंच मिला है हमको खूब उल्टी करेंगे तुम्हारी खाट,
ऐसा ज्ञान मिला अब हमको जीवन में होंगे ठाठ ही ठाठ।
सोशल मीडिया है जादू पिटारा लगता है युवा हो चाहे साठ,
हर कोई इस मंच पर हर ज्ञान रहा जमकर अब बाट।।
आधा अधुरा ज्ञान लेकर पंडित करते औरों की बातें खंडित,
काला अक्षर नहीं भैंस बराबर सभ्यता संस्कृति करते विखंडित।
गोल मटोल से चेहरे लेकर चले हाथ में मोबाइल पकड़ कर,
सोशल मीडिया पर ज्ञान बखारने भले ही अम्मा चली दाने बुहारने।।
सोशल मीडिया ज्ञान खजाना नहीं रहा कोई इससे अनजाना,
जैसा चाहो वैसा ज्ञान मिलेगा जैसा चरित्र वैसा फबेगा।
राजनीति अब बनी अखाड़ा इक दूजे को इस मंच पर पछाड़ा,
ऐसे चरित्र भी यहां देखने को मिलते याद नहीं जिन्हें तीन का पहाड़ा।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
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