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मौजों से न पूछो कि किनारे कहां हैं

                
                                                         
                            मौजों से न पूछो कि किनारे कहां हैं
                                                                 
                            
अंधेरी रात में न देखो कि सितारे कहां हैं
सकून है तो मिल ही जायेगा सब कुछ
न ढूंढो अब वीराने में कि नजारे कहां हैं
तन्हा ही निकलना है रहगुज़र में
सबको
मंजिल पर खबर होगी कि हमारे कहां हैं
रौंद कर निकले आगे है शिकस्त उसकी
कभी सोचा जो हारे वो बेचारे कहां हैं
है चाहत तो दिल झांक कर देखो "वफा"
क्या जरूरत मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे कहां हैं
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3 घंटे पहले

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