कुछ हैं कहानियां जीवन की
अनसुनी अनकही अंजानी
जो ना सुने कोई तो कोई बात नहीं
जो सुने तो होगी हैरानी
जिसे चाही सुनानी वो रुका नहीं
जिसने पर सुनी वो थका नहीं
फिर भी बहुत कुछ है बाकी
ना मय है यहां ना कोई साक़ी
बस कुछ किस्से सौंधे सौंधे से
कुछ सीधे से कुछ औंधे से
कुछ आँसू कुछ मुस्कान लिये
कुछ ग़म की पूरी दुकान लिये
कुछ अपने तो कुछ ग़ैरों के
कुछ वक़्त के उल्टे पैरों के
थोड़ी समझदारी थोड़ी नादानी
पर ना इन किस्सों का कोई सानी
कुछ हैं कहानियां...।
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