जुगनू ओ की आज बैठक हुई
मुद्दा था, सूरज को कैसे हराया जाए
शाख से टूटे पीले पत्ते चिल्लाए
आंधी को कैसे फसाया जाये
नल से टपके बूंदों ने कहा
क्यों ना दरिया को ललकारा जाए
कुछ बिखरे हुए तिनके बोले
बाढ़ को अब रोका जाए
ऐसे बहुत मिलेंगे सपनों में जीने वाले
चलो अब सपनों को जीया जाए
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