मैंने
न दोस्ती का अर्थ जाना,
न प्रेम की अग्नि को पहचाना।
इसीलिए
मेरी आँतें ही
अब तक जीवित हैं।
साथ में हैं
मेरी दोनों किडनियाँ,
जो निरंतर श्रम करते करते
धीरे धीरे घिसती जा रही हैं।
शायद मेरे भीतर
बाकी सब कुछ
बहुत पहले ही
मौन हो चुका है।
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