“इस अधिकार-वैभव के शिखर पर,
धन के निकट भी सिर झुकाने को तैयार नहीं;
पर अहंकारी सौन्दर्य के सान्निध्य में,
हर प्रकार से टोपी उतारकर
नतमस्तक खड़ा रहूँगा!”
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